
प्रेस नोट
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों और आम जनता के लिए खतरे की घंटी, विरोध तेज
23 मार्च को करनाल में किसान-मजदूर जन क्रांति रैली के रूप में इस डील के विरोध में विशाल जनसमूह जुटेगा: गुरनाम सिंह चढ़ूनी
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (ट्रेड डील) तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अगर अमेरिका के साथ यह समझौता जल्दी की जल्दी किया गया, तो इसे वापस लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ट्रेड एग्रीमेंट हो गया तो उसे बदलना मुश्किल होता है: गुरनाम सिंह चढ़ूनी
चंडीगढ़: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर किसानों और आम जनता की ओर से तीव्र विरोध की आवाज उठ रही है। इस डील को लेकर किसानों का कहना है कि अगर कृषि क्षेत्र को इस मुक्त व्यापार समझौते में शामिल किया जाता है, तो इसके परिणाम भारतीय किसानों के लिए बेहद खतरनाक होंगे। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान इसे अमेरिकी किसानों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएंगे, जिससे देश में खेती की स्थिति गंभीर हो सकती है।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने यह भी आरोप है कि इस व्यापार समझौते से न सिर्फ कृषि, बल्कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। विशेष रूप से डेयरी क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा, MSP नीति जैसी सरकारी खरीद प्रणाली जैसी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का खेती व किसानों पर नियंत्रण बढ़ सकता है, जिससे उनकी स्थिति और भी कमजोर हो जाएगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रभाव
सस्ते आयात से स्थानीय बाजार पर असर
अमेरिका के किसानों को बड़ी सब्सिडी मिलने के कारण उनके उत्पाद जैसे गेहूं, मक्का, सोयाबीन और डेयरी उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं। इससे भारतीय किसान को कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ेगी और स्थानीय बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव
भारत का डेयरी सेक्टर करीब 8 करोड़ परिवारों से जुड़ा हुआ है। अमेरिका से डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ने से भारतीय डेयरी उत्पादकों को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनका व्यापार प्रभावित हो सकता है।
बीज और कृषि कंपनियों पर नियंत्रण
इस व्यापार समझौते के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कृषि क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ सकता है। इससे भारतीय किसानों को महंगे बीज, कीटनाशक और कृषि तकनीकी उपकरण खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
कानूनी बदलाव का दबाव
गुरनाम सिंह चढ़ूनी का आरोप है कि इस समझौते के जरिए भारत पर खाद्य सुरक्षा और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) जैसी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाला जा सकता है, जिससे सरकार को इन नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है।
(दूसरा पेज)
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (ट्रेड डील) तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। अगर सरकार ने इसे जल्दबाजी में लागू किया, तो इसे वापस लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समझौते को बदलना मुश्किल होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए इस डील को लेकर व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।
मुख्य मांगें:
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर तुरंत रोक लगाई जाए और इसके प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाए।
शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए, ताकि देश की आम जनता को सस्ती और सुलभ सेवाएं मिलती रहें।
MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी दी जाए और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर न किया जाए।
नए बीज, दवाइयों और तकनीकी उपकरणों की कीमतों पर नियंत्रण रखा जाए, ताकि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाए और सरकार द्वारा लागू योजनाओं में किसी भी प्रकार की कटौती न की जाए।
गन्ने पर उत्पादन की लागत के अनुसार मूल्य दिया जाए। किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने पर कम से कम 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए।
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी का मानना है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो पूरे देश में आंदोलन तेज किया जाएगा। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि भारतीय किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कृषि क्षेत्र की नहीं, बल्कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था और जनता के अधिकारों की भी है। अगर सरकार ने इस मामले में सही कदम नहीं उठाया, तो यह देश के किसानों और आम जनता के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार द्वारा उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 23 मार्च को करनाल में आयोजित होने वाली किसान-मजदूर जन क्रांति रैली में बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
संपर्क:
गुरनाम सिंह चढ़ूनी (9812365244)
रोहित कुमार एवं निखिल भारती (9416291003, 9720720021) ब्यूरो रिपोर्ट : रोशन लाल शर्मा
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