वर्ण व्यवस्था और जातिगत भेदभाव के खिलाफ देश को एकजुट होना होगा : राजबीर सिंह भारतीय
मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संविधान, संसदीय लोकतंत्र और समानता के सिद्धांत का अपमान है:
चंडीगढ़, 14 अगस्त 2026।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे जी की रैली के बाद कथित रूप से रैली स्थल के “शुद्धिकरण” के लिए गंगाजल छिड़कने और धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह विषय किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि भारत के संविधान, सामाजिक समानता और मानव सम्मान से जुड़ा हुआ है।
समाजसेवी एवं ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण उसके कार्यक्रम के बाद किसी स्थान को “शुद्ध” करने की मानसिकता सामने आती है, तो यह आजाद भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय का रास्ता दिखाया तथा संविधान ने जाति आधारित भेदभाव और अस्पृश्यता को कोई वैधानिक स्थान नहीं दिया।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी देश की संसद के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं और लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभवी एवं सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं। उनके प्रति किसी भी प्रकार का जातिगत या सामाजिक भेदभाव केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं माना जा सकता। ऐसी मानसिकता संसदीय लोकतंत्र, संविधान की भावना और करोड़ों भारतीयों के सम्मान पर चोट करती है।
उन्होंने कहा कि देश आज चंद्रमा तक पहुंच रहा है, आधुनिक तकनीक में दुनिया के साथ कदम मिला रहा है, लेकिन यदि कहीं आज भी किसी इंसान को उसकी जाति के आधार पर “शुद्ध” और “अशुद्ध” की मानसिकता से देखा जाता है, तो यह पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि वर्ण व्यवस्था और जातिगत ऊंच-नीच की मानसिकता को किसी भी धर्म, परंपरा या राजनीति के नाम पर जीवित नहीं रखा जा सकता। संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सम्मान दिया है। इसलिए 21वीं सदी के भारत में किसी भी प्रकार की जातिगत श्रेष्ठता या हीनता की भावना के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से राजनीतिक और सामाजिक जीवन में कई बार दोहरी मानसिकता भी दिखाई देती है। चुनाव के समय जिन दलित, पिछड़े और वंचित समाज के लोगों के घर जाकर उनके साथ भोजन किया जाता है, उनसे सम्मानपूर्वक वोट मांगे जाते हैं, यदि वही समाज सत्ता और सार्वजनिक जीवन में सम्मान के साथ आगे आता है तो उसके प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता दिखाई देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि देश को जातिवाद और सांप्रदायिकता की राजनीति से ऊपर उठकर संविधान की मूल भावना—“न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व”—को मजबूत करना होगा। समाज में किसी भी प्रकार की नफरत, जातिगत भेदभाव या धार्मिक आधार पर श्रेष्ठता की भावना देश की एकता और सामाजिक भाईचारे के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को निशाना बनाना इस मुद्दे का समाधान नहीं है। असली लड़ाई उस मानसिकता के खिलाफ है जो इंसान को इंसान से जाति के आधार पर छोटा-बड़ा समझती है। ऐसी मानसिकता चाहे किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक समूह में हो, उसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध होना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सभ्य समाज ऐसी घटनाओं को चुपचाप स्वीकार नहीं कर सकता। भारत का संविधान सर्वोच्च है और देश की जनता संविधान की समानता एवं बंधुत्व की भावना को कमजोर करने वाली किसी भी मानसिकता को स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और देशवासियों से अपील की कि जाति के आधार पर नहीं, इंसानियत और संविधान के आधार पर समाज का निर्माण करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जातिगत भेदभाव नहीं बल्कि समानता, सम्मान और भाईचारे वाला भारत मिल सके।
जारी कर्ता
राजबीर सिंह भारतीय
अध्यक्ष
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13, चंडीगढ़
ब्यूरो रिपोर्ट :रोशन लाल शर्मा
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