E20 पेट्रोल नीति पर सरकार जनहित में श्वेत पत्र जारी करे, आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ स्वीकार्य नहीं : राजबीर सिंह भारतीय

चंडीगढ़।

रि. सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ राजबीर सिंह भारतीय ने E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल नीति को लेकर देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों, मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आम नागरिकों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि इस नीति के पूर्ण क्रियान्वयन से पहले एक विस्तृत श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया जाए, ताकि जनता को स्पष्ट रूप से बताया जा सके कि इस नीति से सरकार, किसानों, तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल उद्योग और आम उपभोक्ताओं को वास्तविक रूप से कितना लाभ और कितना आर्थिक बोझ पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि देशहित, ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ाने जैसे उद्देश्य निश्चित रूप से सराहनीय हैं, लेकिन यदि किसी नीति का आर्थिक बोझ अंततः आम नागरिक पर ही आ जाए, तो उसके सभी पहलुओं पर खुली, वैज्ञानिक और पारदर्शी चर्चा होना लोकतंत्र की आवश्यकता है।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि आज देश की सड़कों पर करोड़ों ऐसी दोपहिया, चारपहिया और व्यावसायिक गाड़ियां चल रही हैं, जिन्हें मूल रूप से सामान्य पेट्रोल के अनुरूप बनाया गया था। यदि E20 के प्रयोग से इन वाहनों की माइलेज कम होती है, इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर, रबर पाइप या अन्य पुर्ज़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है तथा रखरखाव का खर्च बढ़ता है, तो इसका सीधा आर्थिक बोझ आम नागरिक की जेब पर पड़ेगा। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सरकार और तेल कंपनियां माइलेज में संभावित कमी की भरपाई पेट्रोल की कीमत कम करके करेंगी? यदि नहीं, तो इसका भार आखिर कौन उठाएगा?

उन्होंने कहा कि भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग वर्षों से पारंपरिक तकनीक पर आधारित इंजन, स्पेयर पार्ट्स और संबंधित उपकरणों का निर्माण करता आया है। देशभर के हजारों छोटे-बड़े उद्योगों, डीलरों और ऑटो पार्ट्स व्यापारियों के पास पहले से तैयार स्टॉक मौजूद है। यदि नई तकनीक तेजी से लागू होती है, तो इस तैयार माल का भविष्य क्या होगा? इस संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? लाखों मैकेनिकों, छोटे उद्योगों और ऑटो पार्ट्स व्यापारियों के रोजगार की सुरक्षा के लिए सरकार की क्या नीति है? इस पर स्पष्टता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नई तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षित इंजीनियरों, मैकेनिकों और तकनीशियनों की आवश्यकता होगी। यदि पर्याप्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होंगे, तो इसका सीधा असर वाहन मालिकों और उद्योग पर पड़ेगा। इसलिए सरकार पहले देशभर के आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करे, उसके बाद ही व्यापक स्तर पर नई तकनीक लागू की जाए।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को लाभ मिलने की संभावना है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन यदि गन्ना, मक्का, चावल (जीरी), गेहूं अथवा अन्य कृषि उत्पादों का अधिक उपयोग ईंधन उत्पादन में किया जाता है, तो खाद्यान्न, पशु आहार तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण के लिए उसकी क्या ठोस कार्ययोजना है।

ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सैक्टर-13, चंडीगढ़ के लीगल एडवाइजर एडवोकेट अरुण कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसी भी नई राष्ट्रीय नीति को लागू करने से पहले उसका कानूनी, आर्थिक और सामाजिक प्रभाव सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाना चाहिए। यदि किसी नीति से करोड़ों वाहन मालिकों, उद्योगों और व्यापारियों के अधिकार एवं आर्थिक हित प्रभावित होने की संभावना है, तो सरकार का दायित्व है कि वह सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे किसी भी वर्ग पर अनुचित आर्थिक बोझ न पड़े। पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी लोकतांत्रिक शासन की मूल भावना है।

राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं—

E20 नीति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए।

पुराने वाहनों पर होने वाले संभावित प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक किया जाए।

यदि माइलेज में कमी आती है, तो उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने की स्पष्ट नीति बनाई जाए।

E20 के लिए अनुपयुक्त वाहनों के मालिकों के हितों की रक्षा हेतु विशेष प्रावधान किए जाएं।

ऑटोमोबाइल उद्योग, स्पेयर पार्ट्स निर्माताओं, मैकेनिकों और छोटे व्यापारियों के लिए संक्रमण (Transition) नीति बनाई जाए।

नई तकनीक के अनुरूप देशभर में इंजीनियरों, मैकेनिकों और तकनीशियनों का बड़े स्तर पर प्रशिक्षण शुरू किया जाए।

किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ खाद्य महंगाई रोकने के लिए संतुलित कृषि नीति लागू की जाए।

अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सरकार की हर नीति का अंतिम उद्देश्य केवल राजस्व बचत या आयात में कमी नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के आर्थिक हितों की रक्षा भी होना चाहिए। विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब किसान, उद्योग, व्यापारी, वाहन मालिक और आम उपभोक्ता—सभी उसके समान भागीदार बनें। जनहित सर्वोपरि है और जनता के विश्वास के साथ ही कोई भी राष्ट्रीय नीति सफल हो सकती है।

जारीकर्ता :
राजबीर सिंह भारतीय
रि. सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़

एडवोकेट अरुण कुमार वशिष्ठ
लीगल एडवाइजर, ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सैक्टर-13, चंडीगढ़
ब्यूरो रिपोर्ट : रोशन लाल शर्मा



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