CBSE स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 8 शिक्षक संगठनों के ज्वाइंट फ्रंट ने चुनौती दी
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यह मामला सीबीएसई (Central Board of Secondary Education) से संबद्ध सरकारी स्कूलों में टीचर नियुक्ति/टीचर टेस्ट (परीक्षा) के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दायर किए जाने से जुड़ा है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार शिक्षकों और शिक्षक संगठनों की नाराज़गी और अदालत में याचिका के बारे में जानकारी इस प्रकार है
हिमाचल प्रदेश में सरकार ने सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों के लिए एक अलग शिक्षक परीक्षा/टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। इस परीक्षा को पास करना उन शिक्षकों के लिए नियुक्ति/सेवा जारी रखने के लिए अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है।
कई शिक्षक संगठनों ने मिलकर इसका विरोध शुरू किया है। विरोध के कारणों में यह शामिल है कि लंबे समय से काम कर रहे अनुभवी शिक्षकों के हितों के बारे में स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं और यह तर्क दिया जाता है कि नए टेट-स्टाइल टेस्ट की अनिवार्यता से वैध रूप से कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित होंगे
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया
इन संगठनों ने विरोध के रूप में ‘ज्वाइंट टीचर्स फेडरेशन हिमाचल’ जैसे संयुक्त मोर्चे का गठन किया है, जिसमें लगभग 8 शिक्षक संघ/संगठन शामिल हैं जिन्होंने इस परीक्षा के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
उनका तर्क है कि सरकार के निर्णय से वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के संवैधानिक अधिकारों एवं शिक्षा क्षेत्र के हितों को नुकसान पहुँच सकता है। इसके अलावा परीक्षा-संबंधी कई महत्वपूर्ण प्रश्न (जैसे कि वरिष्ठता, परीक्षा शुल्क, परीक्षा केंद्र आदि) स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
शिक्षकों का संयुक्त मोर्चा इस फैसले को हाकीकोर्ट में चुनौती दे चुका है, यह मामला अब न्यायालय के समक्ष है जहाँ वे सरकार के निर्णय की वैधता और उससे शिक्षकों के हितों पर प्रभाव को चुनौती दे रहे हैं।
सार में: हिमाचल प्रदेश में CBSE स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट लागू करने के फैसले के खिलाफ 8 शिक्षक संगठनों का संयुक्त मोर्चा हाईकोर्ट पहुंचा, और उन्होंने सरकार के फैसले को चुनौती दी है क्योंकि वे मानते हैं कि इससे अनुभवी और वर्तमान कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित होंगे।
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