नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के लिए यह बेहद गौरवपूर्ण क्षण रहा, जब प्रदेश की समृद्ध और विविधतापूर्ण पाक कला एवं पारंपरिक खान-पान की संस्कृति को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष राजकीय भोज के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया गया। लिकटेंस्टीन के वंशानुगत प्रिंस एलोइस और वंशानुगत प्रिंसेस सोफी के सम्मान में आयोजित इस राजकीय भोज के लिए विशेष रूप से हिमाचली व्यंजनों का मेन्यू तैयार किया गया था। व्यंजनों के सफल परीक्षण और प्रस्तुति को विदेशी मेहमानों तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने खूब सराहा। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिमाचली खान-पान की अपार संभावनाओं को नई पहचान मिली है।
हिमाचल प्रदेश की वास्तविक पारंपरिक पाक पहचान को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस मेन्यू में पारंपरिक पकवानों, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विशेष सामग्रियों और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यंजनों को शामिल किया गया। इसमें शिमला, सोलन, सिरमौर, कांगड़ा, चंबा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और बिलासपुर की खान-पान परंपराओं की झलक देखने को मिली।
पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों से सजा खास मेन्यू
इस विशेष मेन्यू में खप्टसे, डोलटुपा, तिंगमो, भंगजीरा के लड्डू, बदाना नेस्ट, सेपू बड़ी, गुट्टी का साग, मेवा चना मदरा, लाहौली आलू, गुच्छी से बने व्यंजन, भटूरू, सिड्डू, लिंगड़ी, इंद्रा, लुस्के, भे, धूपनी चाट (किम), गलगल चाट तथा चुली के तेल से तैयार किन्नौरी सेब और अखरोट का सलाद जैसे पारंपरिक पकवान शामिल रहे।
वहीं, मिठाइयों में एप्पल हलवा केक, काउणी का मीठा और कोदा के गीचे बाथू की खीर में परोसे गए। इस विशेष खान-पान के अनुभव का समापन कांगड़ा चाय और हिमालयी जड़ी-बूटियों से तैयार हर्बल चाय के साथ हुआ।
Fact live today Shailja Sam







Source link