*पर्वतीय क्षेत्रों के नदी नालों के समीप अवैध कब्जों पर एनजीटी सख्त, सभी अनधिकृत निर्माण हटाए जाने के जारी किए आदेश*
– *हिप्र के समाजसेवी नाथूराम चौहान की जल जंगल जमीन बचाओ याचिका पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की प्रिंसिपल बेंच ने सुनाया ऐतिहासिक निर्णय*

शिमला। हिमालय के पर्वतीय नदी नालों के तटीय क्षेत्रों के समीप अवैध कब्जों पर एनजीटी सख्त हो गया है। प्राधिकरण ने अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में पर्वतीय क्षेत्रों के सभी नदी नालों के समीप अनधिकृत निर्माण हटाए जाने के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश हिमाचल प्रदेश के समाजसेवी नाथूराम चौहान की जल जंगल जमीन बचाओ याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिमाचल सरकार ने आदेश पारित किए थे कि नदी नालों खडो वह बरसाती खालो से 125 और 130 मीटर के अंदर किसी भी तरह का सरकारी अर्द्ध सरकारी या प्राइवेट किसी भी तरह का निर्माण कंस्ट्रक्शन या डंपिंग कर पानी के बहाव का रास्ता चेंज करना आपदा को निमंत्रण देना है, लेकिन इस कठोर टिप्पणी के बावजूद नदी नालों के समीप निर्माण कार्य धड़ल्ली से जारी चल रहा था। परिणाम स्वरूप करोड़ों रुपयों की राजस्व और भारी जानोमाल की हानि का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।

मामले में संज्ञान लेते हुए समाज सेवी व पर्यावरण विद नाथूराम चौहान ने विगत दिनो राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की प्रधान बेंच में नदी नालो, जल जंगल. जमीन. जीवन और पहाड़ों को बचाने के लिए एक याचिका दायर की थी। जिस पर आज फैसला आ गया है।

माननीय राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की प्रधान शाखा ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रशासन को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया हैं कि नदी नालों के समीप किसी भी तरह का निर्माण किस तरह से हो रहा है। प्राधिकरण ने कहा है कि यदि ऐसा हो रहा है तो उसके रोकथाम के लिए या उसे बंद करने के लिए सरकारी प्रशासन ने कया कदम उठाए है। प्राधिकरण ने आदेश जारी करते हुए इस तरह के निर्माण रोकने और हटाने के त्वरित आदेश जारी किए हैं।

मामले में पैरवीकर्ता अधिवक्ता डॉ. ए. पी. सिंह ने एनजीटी के फैसले पर धन्यवाद जताया।

अपने तीन वर्षों के लंबे संघर्ष के सकारात्मक परिणाम पर समाजसेवी नाथूराम चौहान ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की प्रधान बेंच का धन्यवाद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्राधिकरण का यह फैसला न केवल हिमालय क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसका जल जंगल जमीन और जानवरों के साथ भारी जन धन एवं पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा

संपर्क:
नाथूराम चौहान
समाजसेवी एवं पर्यावरणविद
मोबाईल – 8894949494

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