भारतीय रुपये की कीमत में आ रही गिरावट ने मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की विदेश में पढ़ाई को काफी महंगा बना दिया है। पहले से लोन ले चुके छात्रों के लिए बढ़ती फीस, विदेशी मुद्रा शुल्क और गिरते रुपये के कारण अब कुल खर्च शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक हो गया है। इस गिरावट का सीधा असर न केवल शिक्षा पर, बल्कि विदेश यात्रा की योजनाओं पर भी पड़ा है।

विदेश में पढ़ाई के प्लेटफॉर्म Leap के को-फाउंडर अर्णव कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जो कोर्सेस ज्यादा पॉपुलर हैं, उनका कुल खर्च पिछले एक साल में करीब 3.5 से 4 लाख रुपये तक बढ़ गया है। इससे परिवारों का बजट बिगड़ रहा है और उन पर बोझ बढ़ता जा रहा है।

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