पंजाब के होशियारपुर में साल 1931 में जन्मे लक्ष्मण दास मित्तल की कहानी साबित करती है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। पोस्ट ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने साल 1955 में एलआईसी (LIC) में एक साधारण एजेंट के रूप में करियर की शुरुआत की थी। नौकरी के दौरान ही साल 1970 में उन्होंने ₹20,000 की पूंजी से थ्रेशर मशीन बनाने का बिजनेस शुरू किया, लेकिन वह पूरी तरह फ्लॉप रहा और वे दिवालिया हो गए। इस नाकामी के बाद वे दोबारा नौकरी में लौट आए, लेकिन अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करने का सपना उनके अंदर हमेशा जिंदा रहा।
साल 1990 में एलआईसी से रिटायर होने के बाद, जब लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, उन्होंने एक बड़ा रिस्क लिया। भारतीय किसानों की जरूरत को समझते हुए उन्होंने 64 साल की उम्र में इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड (सोनालिका ट्रैक्टर्स) की बुनियाद रखी। उनकी कड़ी मेहनत और मजबूत विजन का नतीजा है कि आज सोनालिका ट्रैक्टर्स भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के 120 से अधिक देशों में किसानों की पहली पसंद बन चुका है। वर्तमान में 95 वर्ष की आयु में करीब ₹40,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ वे भारत के सबसे उम्रदराज अरबपतियों की सूची में शान से शामिल हैं।
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