*पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने पीजीआईएमईआर में 110 फीट ऊँचे स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज का किया ध्वजारोहण; संस्थान को भारत की चिकित्सा उत्कृष्टता एवं राष्ट्रसेवा का प्रतीक बताया*
” *निस्वार्थ सेवा, अनुसंधान और करुणा के माध्यम से पीजीआईएमईआर तिरंगे की भावना को साकार करता है” – माननीय राज्यपाल*
” *नवाचार, अनुसंधान और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से पीजीआईएमईआर देश का विश्वास निरंतर अर्जित करता रहेगा” – प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर*
चंडीगढ़, 5 अगस्त 2026:देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव के ऐतिहासिक अवसर पर आज पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के कैरों प्रशासनिक भवन परिसर में 110 फीट ऊँचे स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज का भव्य ध्वजारोहण पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश, चंडीगढ़ के प्रशासक *श्री गुलाब चंद कटारिया* द्वारा किया गया।
राष्ट्रगान की गरिमामयी धुन के बीच विशाल तिरंगे के अनावरण के साथ समारोह देशभक्ति एवं प्रेरणा के वातावरण में सम्पन्न हुआ। *इस अवसर पर श्री मंदीप बराड़, गृह सचिव, यूटी चंडीगढ़; प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर; प्रो. संजय जैन, डीन (अकादमिक); प्रो. संजीव हांडा, डीन (अनुसंधान); श्री पंकज राय, उपनिदेशक (प्रशासन) सहित संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।*
इस अवसर को “पीजीआईएमईआर के इतिहास का गौरवशाली दिवस” बताते हुए माननीय राज्यपाल ने संस्थान को स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना के लिए बधाई दी तथा देश की स्वास्थ्य सेवाओं में उसके उत्कृष्ट योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा, ” *भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पीजीआईएमईआर का अत्यंत सम्मानजनक स्थान है। 110 फीट ऊँचे इस स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना कर संस्थान ने न केवल अपनी प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई दी है, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों का गौरव भी बढ़ाया है।* इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मैं निदेशक *प्रो. विवेक लाल* तथा समस्त पीजीआईएमईआर परिवार को हार्दिक बधाई देता हूँ।”
पीजीआईएमईआर की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मान दशकों की समर्पित सेवा का परिणाम है।
उन्होंने कहा, “आज पीजीआईएमईआर जिस स्थान पर है, वह पूरे संस्थान की कर्मनिष्ठा और समर्पण का परिणाम है। उत्तर भारत ही नहीं, देशभर तथा विदेशों से भी लाखों लोग उपचार के लिए यहाँ आते हैं। यही इस संस्थान की उत्कृष्टता का सबसे बड़ा प्रमाण है।”
अंगदान, प्रत्यारोपण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पीजीआईएमईआर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ” *पीजीआईएमईआर के रोटो नॉर्थ (ROTTO North)* को लगातार प्राप्त हो रही राष्ट्रीय मान्यता अत्यंत गौरव का विषय है। बहुत कम संस्थान इतनी निरंतर उत्कृष्टता प्राप्त कर पाते हैं। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में पीजीआईएमईआर का योगदान भी भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।”
*राष्ट्रीय ध्वज और पीजीआईएमईआर की कार्यसंस्कृति के बीच समानता स्थापित करते हुए राज्यपाल ने कहा,*
“जिस प्रकार तिरंगे का केसरिया, श्वेत और हरा रंग क्रमशः त्याग, शांति और प्रगति का प्रतीक हैं, उसी प्रकार पीजीआईएमईआर के चिकित्सक, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कर्मचारी अपनी निस्वार्थ सेवा के माध्यम से इन मूल्यों को जीवंत करते हैं। अशोक चक्र की तरह यह संस्थान भी अनुसंधान, नवाचार और उत्कृष्ट रोगी देखभाल के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है।”
उन्होंने *22 जुलाई 1947* को संविधान सभा द्वारा तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाए जाने का उल्लेख करते हुए मदन लाल ढींगरा, शहीद भगत सिंह और शहीद ऊधम सिंह सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा कहा कि राष्ट्रीय ध्वज आज भी प्रत्येक भारतीय को साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।
राज्यपाल ने *एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर* के संचालन, शीघ्र प्रारंभ होने वाले *एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड* सेंटर तथा माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित *मेडिकल कॉलेज* की सराहना करते हुए कहा कि ये पहलें देश में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं एवं चिकित्सा शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाएंगी।
*सारथी* (SARATHI) पहल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा,
“सारथी जनभागीदारी के माध्यम से सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। हजारों युवा स्वयंसेवकों को रोगी सहायता से जोड़कर पीजीआईएमईआर ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसे देशभर के सैकड़ों अस्पताल अपना रहे हैं। यह करुणा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का सशक्त उदाहरण है।”
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े सभी पेशेवरों का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा,
“इस ध्वज की ऊँचाई हमारे राष्ट्रीय चरित्र की ऊँचाई का भी प्रेरणास्रोत बने। महानता केवल भवनों या आधुनिक तकनीक में नहीं, बल्कि करुणा और निस्वार्थ सेवा में निहित है। किसी भी डिग्री से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस ज्ञान का उपयोग किस भावना के साथ किया जाता है।”
अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने उन सभी चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों और पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके समर्पण ने पीजीआईएमईआर को भारत के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में स्थापित किया।
उन्होंने कहा,
“जिस प्रकार यह तिरंगा पीजीआईएमईआर के ऊपर गर्व से लहरा रहा है, उसी प्रकार यह हमें और भी सशक्त राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता रहे। आज देश-विदेश से लोग उपचार के लिए यहाँ आते हैं, जो इस संस्थान की उत्कृष्टता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण करने का अवसर प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत गौरव की बात है।”
इस अवसर पर माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए *प्रो. विवेक लाल, निदेशक,* पीजीआईएमईआर ने कहा कि यह स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज भारत की एकता, त्याग और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का स्थायी प्रतीक रहेगा।
संस्थान के तीव्र विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा,
“पीजीआईएमईआर निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर पूरी तरह संचालित हो चुका है तथा एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर भी शीघ्र पूर्ण रूप से कार्यशील होगा। हमारा संकल्प है कि देशवासियों को अत्याधुनिक तकनीक और सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।”
*प्रो. विवेक लाल* ने आगे कहा,
“पीजीआईएमईआर सदैव करुणा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और अत्याधुनिक तकनीक का पर्याय रहा है। जो भी सुविधा हमारे रोगियों के हित में होगी, उसे संस्थान में उपलब्ध कराने का हम निरंतर प्रयास करेंगे। नवाचार, अनुसंधान और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से देश ने जो विश्वास हम पर व्यक्त किया है, उस पर खरा उतरना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
समारोह का समापन *प्रो. संजय जैन, डीन* (अकादमिक) द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ।
110 फीट ऊँचे स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना पीजीआईएमईआर की विकास यात्रा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो राष्ट्रसेवा, उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के प्रति संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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