दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
Delhi High Court ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर विवाह से इंकार कर देता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
🔎 क्या कहा अदालत ने?
अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी का झूठा वादा कर बनाए गए शारीरिक संबंध “छलपूर्वक प्राप्त सहमति” माने जा सकते हैं।
यदि कुंडली मिलान जैसी बात सच में महत्वपूर्ण थी, तो उसे संबंध बनाने से पहले स्पष्ट किया जाना चाहिए था।
बाद में इसे बहाने के रूप में इस्तेमाल करना प्रथम दृष्टया आपराधिक मंशा दर्शा सकता है।
📌 सजा का प्रावधान
धारा 69, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है।
मामले में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
📍 मामला क्या था?
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब विवाह की बात आई तो उसने कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से इंकार कर दिया।
⚖️ फैसले का महत्व
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सामाजिक या धार्मिक कारणों का सहारा लेकर झूठे वादे से बनाए गए संबंधों से मुकरना कानूनन अपराध हो सकता है।



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