दिल्ली के सु विख्यात व ऐतिहासिक कांस्टीट्यूशन क्लब के मालवंकर हाल में देश के आठवे प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर समाजसेवी पर्यावरण विद् युवा तुर्क नाथूराम चौहान का यह नारा खूब गुंजा ना पक्ष न विपक्ष केवल निष्पक्ष इस नारे ने पूरे सभागार को जोश से भर दिया कार्यक्रम अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत शाह ने कहा कि इस तरह की सोच और इस तरह के विचार इस तरह की स्पष्टता किसी समय में चंद्रशेखर जी की बातों में भी हुआ करती थी,ना डर ना भय ना लोभ ना लालच यह सब चीजे चंद्रशेखर में भी देखा करते थी,इसी के साथ विभिन्न प्रदेशों से आए बुद्धि जीविओं ने समाजसेवी पर्यावरण बिद व युवा तुर्क नाथूराम चौहान की भूरि भूरि प्रशंसा की सब लोगों ने एक स्वर में कहा कि इस तरह से प्रदेश सरकार या केंद्रीय सरकार के खिलाफ निष्पक्ष बिना किसी डर के बोलने का साहस बिरले ही रखते हैं,श्री रामबहादुर राय जी ने कहा कि जब हम चंद्रशेखर के साथ काम करते थे,तो उनके अंदर भी इसी तरह का जोश जुनून और जज्बा हुआ करता था,सभी बुद्धिजीवियों ने जिन्होने चंद्रशेखर जी के साथ काम किया है उन्होंने कहा कि तुमको यानी (नाथूराम चौहान) को देखकर लगता है कि चंद्रशेखर जी कहीं से दोबारा आ गए हैं,सभागार में देश भर से लगभग डेड हजार के लगभग प्रबुद्ध जनो ने स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर आजाद चंद्रशेखर जी के जन्म शताब्दी वर्ष में सम्मिलित होने आए थे,जिससे कि हम सब सिरमौर वह हिमाचल वासियों को गर्व की अनुभूति उस समय हुई जब इतने बड़े कार्यक्रम में सिरमौर हिमाचल के युवा को देश के प्रबुद्ध लोगों के द्वारा सम्मानीत किया गया कार्यक्रम के सम्मान पर नाथूराम चौहान ने कहा कि यह सम्मान उनका नहीं है बल्कि सभागार में उपस्थित सभी बुद्धिजीवों का है उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मान उनके माता-पिता गुरुजनों और बड़ों का आशीर्वाद है उन्होंने सभी लोगों को विश्वास दिलाया कि आगे भी इसी तरह से बिना डरे बिना झुके बिना रुके जनहित के कार्य होते रहेंगे उसके लिए प्रदेश सरकार से लड़ना पड़े या केंद्रीय सरकार से लड़ना पड़े हम कभी पीछे नहीं रहेंगे यह लड़ाई रोड पर लड़नी पड़े या कोर्ट में लड़नी पड़े आम आदमी की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा मेरी ओर से यह श्रद्धांजलि माननीय स्वर्ग श्री चंद्रशेखर जी के लिए है,आगे नाथूराम चौहान ने कहा कि स्वर्गीय चंद्रशेखर जी वह व्यक्तित्व थे जो इंदिरा गांधी जैसी सशक्त प्रधानमंत्री के आंखों में आंखें डालकर सवाल-जवाब पूछने की हिम्मत रखते थे हमने भी उनसे ही सीखा है की असली समाजवाद तभी आएगा जब समाज के पिछडे से पिछडे व्यक्ति को भी मुख्य धारा में जोड़ा जाएगा अंत में नाथूराम चौहान ने उनका सम्मान करने व देने के लिए सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का धन्यवाद किया
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