जस्टिस फॉर देवात्मा हिमालय की लड़ाई सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण तक लड़ने के लिए जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय के संस्थापक व लीगल एडवाइजर दोनों लोग हिमालय को बचाने के मुहिम में आर पर की लड़ाई के लिए तैयार है,इनका मानना है कि आज तक के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय लड़ रहा है यह किसी जाति धर्म संप्रदाय देश की लड़ाई नहीं है बल्कि मानव समाज और मानव सभ्यता की लड़ाई है जल जंगल जमीन जीव जंतु और जीवन के निमित्त इससे बड़ी लड़ाई आज से नहीं पहले नहीं लड़ी गई है नाथूराम चौहान ने लोगों से आवाहन किया है,कि बढ़-चढ़कर जन आंदोलन मे योगदान देना चाहिए यह लड़ाई किसी एक दो व्यक्ति की नहीं पूरे मानव समाज और पूरे मानव सभ्यता की लड़ाई है अगर हम अभी नहीं संभले तो 8 से 10 सालों के अंदर दुनिया का अस्तित्व खत्म हो जाएगा सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ ए पी सिंह जी ने कहा कि यह लड़ाई केवल नाथूराम चौहान की लड़ाई नहीं है और न केवल जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय की लड़ाई है यह लड़ाई मानव सभ्यता की पूरे मानव समाज के लिए लड़ाई है जिसमें सबको सहयोग करते हुए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए श्री सिंह ने यह संकल्प दोहराया है कि यह लड़ाई बराबर चलती रहेगी जब तक की देवात्मा हिमालय को हम न्याय नही दिला पाए देव आत्मा हिमालय ने हमें सब कुछ दिया पर बदले में हमने उन्हें घाव और पीड़ा के सिवा कुछ नहीं दिया पर अब यह पीड़ा देव आत्मा के लिए असहनीय हो गई है जब देव आत्माएं कुपित होती है तो विनाश निश्चित ही है आत: लोगों को अभी भी समय रहते हैं जागना होगा और जबरदस्ती के विकास जो कि आज विनाश का पर्याय बन चुका है उससे देव आत्मा हिमालय और पूरी मानव सभ्यता को बचना होगा निश्चित रूप से अगर हिमालय नहीं बचेगा तो जल जंगल जमीन जीवन जंतु सबका सर्वनाम निश्चित ही है वह दिन दूर नहीं जब हम लोगों को एल पी जी की तरह ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लाइन में लगना पड़ेगा और तब बहुत देर हो चुकी होगी आत: अभी समय है हमारी लड़ाई में प्रत्येक व्यक्ति का भागीदारी होना मानव होने का सबूत है अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने हिस्से की लड़ाई हम सबके साथ मिलकर लड़ने चाहिए
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